Posts

के. के. राजीव (K. K. RAJEEV)

  ☆         के. के. राजीव  एक  प्रगतिशील भारतीय  लेखक  हैं, जिनकी पहली  ही पुस्तक  "द साउंड ऑफ हार्ट"  ने बहुत प्रसिद्धि हासिल की है, "द साउंड ऑफ हार्ट"  आत्म-खोज, प्रेम और जीवन के मूल्यों पर केंद्रित है। के के राजीव की लेखन शैली सरल, भावपूर्ण और मानवता को केंद्र में रखकर सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर गहराई से विश्लेषण प्रस्तुत करती है। उनकी पुस्तक न केवल जानकारीपूर्ण है, बल्कि यह पाठकों को अपने विचारों को विकसित करने और जीवन के मूल्यों को समझने में मदद करती है। ● जीवन परिचय: - नाम: के. के. राजीव - जन्म: बिहार, भारत - शिक्षा: अभियांत्रिकी में स्नातक, राजनीतिक विज्ञान और हिन्दी साहित्य में स्नातकोत्तर - व्यवसाय: अभियंता, लेखक, विचारक और राजनीतिक विश्लेषक ● साहित्यिक कार्य: ▪︎ प्रकाशित रचनाएँ - "द साउंड ऑफ हार्ट" (The Sound of Heart): novel - "मधुलिका" ( madhulika): poetry - "प्यार की पुष्पांजलि" (pyar ki pusbpanjali): poetry ▪︎ शीघ्र प्रकाशित होगी - "तेजस्वी भव: बिहार" (tejashwi bhawa bihar): Biography - ...

उन्मुक्त हो

उन्मुक्त हो... उन्मुक्त   हो,   स्वच्छंद    हो, मेरे  "प्रेम" की  अनुबंध  तू। हो       मेरी       अनुरागिनी, मेरी  कविताओं  की  छंद तू। हो   प्यार    की   पुष्पांजलि, हर    हार  की   है  'द्वंद'  तू। पतझर     की    हरियालीयां, मेरे   जीवन  की   है  रंग  तू। कुमुदिनी हो, तुम कामिनी हो, हो  कामलता  की   सुगंध तू। मधुर,   प्रीत   की  उपवन हो, मेरी  सांसो   का   उपबंध  तू। सरस्वती,  गंगा  की धारा हो, बहती  यमुना  सा  स्वतंत्र तू। कृष्णा    की     हो    बांसुरी, मेरे  आत्मा   की  सत्संग  तू। जगत आदी   की   शक्ति...

प्रेम रंग की होली

प्रेम रंग की होली... पत्ते बिखर-बिखर सी गई है, टूट-टूट     कर   डाली   से। अनबन   जैसे   हो   गई  हो, बसंत   की   हरियाली    से। अंग-अंग   अब  टूट  रही है, झुम     रही       पूर्वाइ    से। कुम्हला गई है यौवन गुलों के पछुवा    की    अंगड़ाई   से। कलियाँ भी शरमा  रही अब, देख   भवरे   की   टोली  से। झुम कर  पीने  चलें  हों जैसे फाग  के मय  की प्याली से। तन मन पुलकित हो उठता है, रंगों       और     रंगोली   से। बरस  रही  आनंद,  प्रेम  संग, ब्रज  के ऑगन की होली  से। आनंदित हो  उठा है  "श्रृष्टि" इनकी  मधुर   ठिठोली    से। देख    रा...

तुमको शक़ है

तुमको शक़ है मेरे अस्तित्व पर, मेरे वर्तमान पर मेरे भविष्य पर, शंसय को यथार्थ मिल जायेंगा हर संभव था तेरे आशिष पर।।। जो दहलीज पर पड़ा है बेशक ठुकरा दो आज तुम, कल ऑखें छलक आयेंगी, तेरे इस जलते हुए इश्क़ पर... मैं तो एक कतरा हूँ हवाओ का, तुफान बन कर गुजर जाऊँगा... यकीन तुम ही थे मेरे नसीब का, उठा लो उंगलियां मेरे चरित्र पर। तुमको शक़ है मेरे अस्तित्व पर, मेरे वर्तमान पर मेरे भविष्य पर।           -के के राजीव

एक लंबी कहानी है

एक  लंबी    कहानी   है, कुछ   ख्वाब   पुराने  हैं। सांसो   के    कतरन   में, कुछ  जज्बात  पुराने  हैं। बक्त   के  नासमझी  का, ये   सवालात   पुराने  है। नजरों  की  हिमाकत  है, जो ये  हालात  पुराने  हैं। सहारे बर्फ  के ठंडक का, कुछ  सिहरन सिरहाने है। नहाने   की   हिदायत  है, ये  बरसते  धूप  पुराने हैं। अपने   ही  नजाकत  का, अपनों से शिकायत  क्या? जरा सी चाह मोहब्बत की मेरी एक मात्र क़यामत है।            -के के राजीव
कशिश तेरी आँखों की... कशिश तेरी आँखों  की,  इश्क़  में  नुमाइंदगी कहता है... जुबान खामोश  है  मगर  मोहब्बत में बंदगी कहता है... तूं न दर्द, न   हमदर्द,  न  हमसफर हो मेरी राहों का, मगर... उलझ कर तुझसे मेरी नजरें तुझको जिंदगी कहता है...                     -के के राजीव

और मैं हूँ

और मैं हूँ... रास्ते ओझल सी है आंखों से अब तो, पांव तले  कुछ  पग  जमीं  है और मैं  हूं। ख्वाबों में  ख्वाब देखता  रहा कल तलक, आज मेरी आंखो  में  नमी  है और  मैं  हूँ। पाने की ख्वाहिश मात्र से पूरी थी जिंदगी, अब हर तरफ  तेरी   कमी  है और  मैं  हूं।                                                - के के राजीव