प्रेम ही सर्वोपरि है (भाग-1)
प्रेम ही सर्वोपरि है ...क्योंकि प्रेम चित्त की एक दशा है, यही एक मात्र वो अनुभूति है, जो संसार के समस्त प्राणियों के लिए आपके कोमल भावनाओं द्वारा प्रदर्शित होता है! प्रेम का अर्थ है किसी के लिए आपके अंदर की सच्चाई और स्वच्छ भावनाएं, क्योंकि जहाँ सत्य है वहीं प्रेम है अर्थात सत्य ही प्रेम है... राजीव अर्थात "कमल" जिसके पंखुरीयों पर अनगिनत, अनंत शूल विराजते है परंतु वे अपनी बाहरी संरचना के खिलाफ़ सौंदर्य के साथ-साथ स्वच्छंद भाव से लोगों के जीवन में खुशबू लुटाता है और संभवतः इसी में इसके जीवन की सार्थकता भी निहित है। इतना ही नहीं अगर कोई श्यामल भूखा दिखे तो उसे भी गोद में लेकर अपनी पंखुरीयों से डक कर मीठा पान कराता परंतु वही "राजीव" आज दुखी है, हताश है, नाराज है, उदास है और आखिर हो भी क्य...